कविता मित्र की, पसंद मेरी
18 जुलाई/शुक्रवार/दस बजकर चालीस मिनट पर
गुफा
शुरू होता है यहां से
भय और अँधेरा
भय और अंधेरे को
भेदने की इच्छा भी
शुरू होती है यहीं से।
-कुमार अंबुज
Friday, July 18, 2008
Posted by Posted by
अंगूठा छाप
at
10:46 AM
Categories:
Labels:
kavita
4
comments
Thursday, July 17, 2008
ऐसी आबादी और कहां...!
17जुलाई/गुरूवार, सुबह दस बजकर पचास मिनट
अरे ब्बाप रे! अपने यहां रेल में जैसी बमचकबाजी या हूलगदागद देखने को मिलती है वो तो कुछ भी नहीं है बंधु!!
तनिक ये वीडियो तो मुलाहिजा फरमाएं। मेड इन चाइना है । इस लिंक पर क्लिक करें - http://video.google.com/videoplay?docid=5031425949179516003&hl=en
Posted by Posted by
अंगूठा छाप
at
10:45 AM
Categories:
Labels:
shubhaanallah
6
comments
Subscribe to:
Posts (Atom)